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मां का दूध पीने के बाद शिशॠको उलà¥â€à¤Ÿà¥€ होना सामानà¥â€à¤¯ बात है। कई बार जब शिशॠको पेट à¤à¤° जाता है और वो जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध पी लेता है तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में उलà¥â€à¤Ÿà¥€ हो जाती है। शिशॠके बढ़ने पर यह समसà¥â€à¤¯à¤¾ अपने आप ठीक हो जाती है।
शिशॠको किन कारणों से उलà¥â€à¤Ÿà¥€ होती है---
शिशà¥à¤“ं को कà¤à¥€-कà¤à¥€ उलà¥à¤Ÿà¥€ हो सकती है, लेकिन अगर यह हर फीड के बाद होता है, तो तà¥à¤°à¤‚त अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से मिलें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह पेट के आउटलेट पर मांसपेशियों के मोटे होने के कारण होने वाली रà¥à¤•ावट के कारण हो सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹ इसोफेजियल रीफलकà¥à¤¸ बीमारी का पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• लकà¥à¤·à¤£ हो सकता है। बचà¥à¤šà¥‡ जब दूध पीते हैं, तो दूध आहार नली से अमाशय में जाता है। फिर पाचन रस में मिलकर छोटी आंत से बड़ी आंत में जाता है। लेकिन यह बीमारी होने पर दूध अमाशय से आहार नली से होते हà¥à¤ वापस जाता है। इससे बचà¥à¤šà¥‡ बार- बार उलà¥à¤Ÿà¥€ करते हैं। उनकी पेट में तेज दरà¥à¤¦ à¤à¥€ होता है। पेट फूल जाता है। इस तकलीफ से बचà¥à¤šà¥‡ दूध पीना à¤à¥€ छोड़े देते हैं। वैसे मां का दूध पीने वाले बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यह परेशानी कम होती है।
रिफलकà¥â€à¤¸-
शिशॠकी à¤à¥‹à¤œà¤¨ नली पूरी तरह मैचà¥â€à¤¯à¥‹à¤° नहीं होती है इसलिठदूध पीने के बाद दूध वापस à¤à¥‹à¤œà¤¨ नली में आ सकता है जिससे शिशॠमà¥à¤‚ह या नाक से दूध बाहर निकाल देता है। शिशॠके 18 महीने के होने पर अकà¥â€à¤¸à¤° यह समसà¥â€à¤¯à¤¾ ठीक हो जाती है।
उलà¥â€à¤Ÿà¥€ रोकने के लिठकà¥â€à¤¯à¤¾ करें:-
जब à¤à¥€ शिशॠको दूध पिलाà¤à¤‚ तो अपने साथ साफ कपड़ा जरूर रखें ताकि जब à¤à¥€ शिशॠको उलà¥â€à¤Ÿà¥€ हो तà¤à¥€ तà¥à¤°à¤‚त उसका मà¥à¤‚ह साफ किया जा सके। दूध पिलाने के बाद उसे हिलाà¤à¤‚ नहीं। रोज बचà¥â€à¤šà¥‡ को à¤à¤• ही समय पर दूध पिलाà¤à¤‚। रोज अलग समय पर दूध पिलाने पर समसà¥â€à¤¯à¤¾ और गंà¤à¥€à¤° हो सकती है।
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